हाल ही में असम की बोरजुली आर्द्रभूमि (Borjuli Wetland) को जैव-विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site – BHS) घोषित किया गया है। यह मान्यता यहां पाई जाने वाली जंगली धान की प्रजाति – ओराइजा रूफिपोगोन (Oryza rufipogon) के संरक्षण के लिए दी गई है।
यह कदम भारत की कृषि जैव-विविधता को सुरक्षित रखने और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल धान की नई किस्मों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रमुख बिंदु
1. जैव-विविधता विरासत स्थल (BHS) की मान्यता
- बोरजुली आर्द्रभूमि को Biodiversity Heritage Site (BHS) घोषित किया गया।
- इसका उद्देश्य जंगली धान (Wild Rice) के प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है।
2. जंगली धान (Oryza rufipogon) का महत्व
- इसे खेती किए जाने वाले धान (Cultivated Rice) का पूर्वज माना जाता है।
- इसमें प्राकृतिक रूप से कई उपयोगी गुण पाए जाते हैं—
- 🐛 कीट प्रतिरोधक क्षमता
- 🦠 रोग प्रतिरोधक क्षमता
- 🌊 बाढ़ सहनशीलता
- 🧂 लवणता (Salinity) सहनशीलता
इन्हीं गुणों के कारण यह भविष्य की जलवायु-सहिष्णु (Climate Resilient) धान किस्मों के विकास में अत्यंत उपयोगी है।
3. संरक्षण परियोजना
- यह पहल वर्ष 2022 में शुरू की गई इन-सीटू (In-Situ) संरक्षण परियोजना का हिस्सा है।
- परियोजना असम के सोनितपुर जिले में संचालित की जा रही है।
4. क्रियान्वयन एजेंसियां
- राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) द्वारा वित्तपोषित।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBPGR) द्वारा कार्यान्वित।
- असम राज्य जैव-विविधता बोर्ड के सहयोग से संचालित।
इस मान्यता का महत्व
✅ जंगली धान की आनुवंशिक विविधता का संरक्षण होगा।
✅ जलवायु परिवर्तन के अनुरूप नई धान किस्मों के विकास में सहायता मिलेगी।
✅ भारत की कृषि जैव-विविधता और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
✅ प्राकृतिक आर्द्रभूमियों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
✅ सतत कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।
“असम की बोरजुली आर्द्रभूमि को जैव-विविधता विरासत स्थल घोषित करना जंगली धान के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि जैव-विविधता को सशक्त बनाने तथा जलवायु-सहिष्णु फसलों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

No responses yet